आज 12 ओक्टुबर मंगलमय हो

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🙏मंगलमय सुप्रभात 🙏
🙏आज 12 ओक्टुबर नवरात्रि के चौथे दिन सृष्टि की आदि-स्वरूपा, आदिशक्ति सूर्यमंडल के भीतर के निवास करने वाली दैदीप्यमान देवी जिनके तेज और प्रकाश से दसों दिशाएँ प्रकाशित होती है , ब्रह्मांड की सभी वस्तुओं और प्राणियों में अवस्थित तेज की छाया प्रदान करने वाली अष्टभुजा देवी माँ कुष्माण्डा की आज आराधना आप सबके अंतः करण को प्रकाशमान करे । माँ के इस दैदीप्यमान स्वरूप को बारंबार नमन ।

🙏आज हिंदुस्तान के स्वतन्त्रता संग्राम महान सेनानी, प्रखर चिन्तक, समाजवादी राजनेता ,महान् विचारक, भारत एक अजेय योद्धा राम मनोहर लोहिया की पुण्यतिथि है । देश की राजनीति में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान और स्वतंत्रता के बाद ऐसे कई नेता हुए जिन्होंने अपने दम पर शासन का रुख़ बदल दिया जिनमें एक थे राममनोहर लोहिया। अपनी प्रखर देशभक्ति और बेलौस तेजस्‍वी समाजवादी विचारों के कारण अपने समर्थकों के साथ ही डॉ. लोहिया ने अपने विरोधियों के मध्‍य भी अपार सम्‍मान हासिल किया। डॉ. लोहिया सहज परन्तु निडर अवधूत राजनीतिज्ञ थे। उनमें सन्त की सन्तता, फक्कड़पन, मस्ती, निर्लिप्तता और अपूर्व त्याग की भावना थी। डॉ. लोहिया मानव की स्थापना के पक्षधर समाजवादी थे। वे समाजवादी भी इस अर्थ में थे कि, समाज ही उनका कार्यक्षेत्र था और वे अपने कार्यक्षेत्र को जनमंगल की अनुभूतियों से महकाना चाहते थे। वे चाहते थे कि, व्यक्ति-व्यक्ति के बीच कोई भेद, कोई दुराव और कोई दीवार न रहे। सब जन समान हों। सब जन सबका मंगल चाहते हों। सबमें वे हों और उनमें सब हों। वे दार्शनिक व्यवहार के पक्ष में नहीं थे। उनकी दृष्टि में जन को यथार्थ और सत्य से परिचित कराया जाना चाहिए। प्रत्येक जन जाने की कौन उनका मित्र है? कौन शत्रु है? जनता को वे जनतंत्र का निर्णायक मानते थे।

लोहिया का जन्म कृष्ण चैत्र तृतीया, 23 मार्च 1910 को अकबरपुर, फैजाबाद यूपी में जन्मलेने वाले डॉ लोहिया लोहिया की चिन्तन – धारा कभी देश-काल की सीमा की बन्दी नहीं रही। विश्व की रचना और विकास के बारे में उनकी अनोखी व अद्वितीय दृष्टि थी। इसलिए उन्होंने सदा ही विश्व-नागरिकता का सपना देखा था।
लोहिया बम्बई , काशी , कोलकाता में शिक्षा पूरी कर बर्लिन तक पहुचे जहां से डॉ लोहिया बन कर अर्थशास्त्र से पी.एच.डी. करके देश लौटे ।
लोहिया कलम के धनी थे। प्रतिभा की धार और विद्धत्ता ही उनकी पूँजी थी।
लोहिया एक नयी सभ्यता और संस्कृति के द्रष्टा और निर्माता थे। लेकिन आधुनिक युग जहाँ उनके दर्शन की उपेक्षा नहीं कर सका, वहीं उन्हें पूरी तरह आत्मसात भी नहीं कर सका। अपनी प्रखरता, ओजस्विता, मौलिकता, विस्तार और व्यापक गुणों के कारण वे अधिकांश में लोगों की पकड़ से बाहर रहे।
लोहिया अनेक सिद्धान्तों, कार्यक्रमों और क्रांतियों के जनक हैं। वे सभी अन्यायों के विरुद्ध एक साथ जेहाद बोलने के पक्षपाती थे। उन्होंने एक साथ सात क्रांतियों का आह्वान किया।
30 सितम्बर, 1967 को लोहिया को नई दिल्ली के विलिंग्डन अस्पताल, अब जिसे लोहिया अस्पताल कहा जाता है, में पौरुष ग्रंथि के आपरेशन के लिए भर्ती किया गया जहाँ 12 अक्टूबर 1967 को उनका देहांत 57 वर्ष की आयु में हो गया।
डॉ. लोहिया की विरासत और विचारधारा अत्‍यंत प्रखर और प्रभावशाली होने के बावजूद आज के राजनीतिक दौर में देश के जनजीवन पर अपना अपेक्षित प्रभाव क़ायम रखने में नाकाम साबित हुई। उनके अनुयायी उनकी तरह विचार और आचरण के अद्वैत को कदापि क़ायम नहीं रख सके। आज उनकी पुण्यतिथि है ऐसे महान नेता को श्रद्धांजलि ।

🙏पूर्व ग्वालियर रियासत की महारानी भाजपा नेत्री स्व. राजमाता विजयाराजे सिंधिया की आज 100वीं जयंती है।
ग्वालियर भारत के विशालतम और संपन्नतम राजे – रजवाड़ों में से एक है। विजयाराजे सिंधिया अपने पति जीवाजी राव सिंधिया की मृत्यु के बाद कांग्रेस के टिकट पर संसद सदस्य बनीं थीं। अपने सैध्दांतिक मूल्यों के दिशा निर्देश के कारण विजयाराजे सिंधिया कांग्रेस छोड़कर जनसंघ (भाजपा) में शामिल हो गईं। विजयाराजे सिंधिया का रिश्ता एक राजपरिवार से होते हुए भी वे अपनी ईमानदारी, सादगी और प्रतिबद्धता के कारण पार्टी में सर्वप्रिय बन गईं।
1957 से 1998 तक लगातार लोकसभा चुनाव में जीत का पताका लहराते रही आखरी में अपनी अस्वस्थता के कारण चुनाव में अस्वस्थ राजमाता ने अपने पुत्र माधवराव सिंधिया को यह आसंदी छोड़ दी जिसे उन्होंने जीत हाशिल किये ।
राजमाता के रूप में प्रसिद्ध त्याग एवं समर्पण की प्रति मूर्ति विजयाराजे सिंधिया ने राजसी ठाठ-वाट का मोह त्यागकर जनसेवा को अपनाया तथा सत्ता के शिखर पर पहुँचने के बाद भी उन्होंने जनसेवा से कभी अपना मुख नहीं मोड़ा। इसलिये राजमाता को अपना प्रेरणा स्रोत मानकर हमें उनके पदचिह्नों एवं आदर्शों पर चलना चाहिये।
ग्वालियर के राजवंश की राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने लोगों के दिलों पर बरसों राज किया। सन् 1998 से राजमाता का स्वास्थ्य ख़राब रहने लगा और 25 जनवरी, 2001 में राजमाता विजयाराजे सिंधिया का निधन हो गया।

🙏सबकी पूजा एक सी, अलग -अलग हर रीत।  मस्जिद जाए मौलवी, कोयल गाए गीत॥
पूजा -घर में मूरती, मीरा के संग श्याम।
जितनी जिसकी चाकरी, उतने उसके दाम॥

दिल्ली कॉर्पोरेशन के रिकॉर्ड के अनुसार आज के दिन 1938 में जन्मे मुक़्तदा हसन निदा फ़ाज़ली या  निदा फ़ाज़ली आधुनिक उर्दू शायरी के बहुत ही लोकप्रिय शायर है । आजादी के समय हिन्दू-मुस्लिम क़ौमी दंगों से तंग आ कर उनके माता-पिता पाकिस्तान जा के बस गए, लेकिन निदा यहीं भारत में रहे। कमाई की तलाश में कई शहरों में भटके। आखिर में बम्बई पहुचे जहाँ लंबे संघर्ष के बाद उनके लिखे फ़िल्म रजिया सुल्तान का गीत “आई ज़ंजीर की झन्कार, ख़ुदा ख़ैर कर” ,  ने उन्हें पहचान दिला दी । उसके बाद तो फिर एक से बढ़ कर एक गीत उनके हिट होते गए जिसमे ….
कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता  कहीं जमीं तो ,होश वालों को खबर क्या, बेखुदी क्या चीज है ,तू इस तरह से मेरी ज़िंदग़ी में शामिल है, तेरा हिज्र मेरा नसीब है, तेरा गम मेरी हयात है ….
आज उनकी जयंती है ।।।

🙏बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी के द्वारा आज राजगीर में राज्य खेल अकादमी एवं अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का शिलान्यास एवं कार्यारंभ किया जाएगा । इस पूरे परियोजना पर 630 करोड़ खर्च होंगे ।

🙏विक्रम संवत् 2075 आज आश्विन शुक्ल चतुर्थी दिन शुक्रवार आप सभी के लिए शुभ और मनोकूल हो ।
जय श्री राम