इतिहास के स्वर्णिम अक्षरों में अंकित आज के दिन की मंगलमय सुप्रभात 🙏

0
288

इतिहास के स्वर्णिम अक्षरों में अंकित आज के दिन की मंगलमय सुप्रभात 🙏

आज 3 दिसंबर के दिन का इतिहास भारत के लिहाज से बहुत ज्यादा ही महत्वपूर्ण है, इतिहास मानव की विशिष्ट घटनाओं का नाम ही इतिहास है या फिर प्राचीनता से नवीनता की ओर आने वाली, मानवजाति से संबंधित घटनाओं का वर्णन इतिहास है … आज पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र बाबू , स्वतंत्रता संग्राम के सिपाही खुदीराम बोस , मशहूर चित्रकार नंदलाल बोस की जयंती है । वही हॉकी के जादूगर मेज़र ध्यानचंद , सदाबहार अभिनेता देवआनंद की पुण्यतिथि है । आज भोपाल त्रासदी की 34वाँ साल है तो आज अन्तरराष्ट्रीय विकलांग दिवस है । आज मार्ग शीर्ष मास की कृष्ण एकादशी या उत्पन्ना एकादशी है। सिवान जिले का 46वाँ वर्षगांठ है । बिहार बोर्ड आज के दिन कक “मेधा दिवस” के रूप में मनाता है।

आज भारत के प्रथम राष्ट्रपति डा. राजेन्द्र प्रसाद की 134 वीं जयंती है । आज ही के दिन 1884 में सीवान जिले के जीरादेई ग्राम उनका जन्म हुआ था । उन्ही के जयंती पर सारण से अलग हो कर सिवान नया जिला बना जिसका आज 46 वीं वर्षगांठ है । राजेन्द्र प्रसाद बेहद प्रतिभाशाली और विद्वान् व्यक्ति थे। राजेन्द्र प्रसाद, भारत के एकमात्र राष्ट्रपति थे जिन्होंने दो कार्यकालों तक राष्ट्रपति पद पर कार्य किया। राजेंद्र बाबू के जन्मदिन को बिहार बोर्ड “मेधा दिवस” के रूप में मनाता है।

स्वतंत्रता संग्राम में राजेन्द्र बाबु ने अन्य नेताओं के साथ राष्ट्र निर्माण का अति विशाल कार्य अपने हाथों में ले रखा था । उस समय उनके भीतर जल रही राष्ट्रीयता की ज्वाला को कोई नहीं बुझा सकता था। विश्व इतिहास में ऐसा उदाहरण नहीं मिलेगा जहां इतने निरस्त्र लोग अहिंसा अपनाकर इतनी बहादुरी से लड़े हों। सत्य और न्याय के आदर्शों को धारण करके उनका ब्रिटिश शासन को हिलाने का निश्चय दृढ़ होता जा रहा था। उस वक्त उनका कथन था अब राजनीति शिक्षितों और व्यवसायी लोगों के कमरों से निकलकर देहात की झोपड़ियों में प्रवेश कर गई थी और इसमें हिस्सा लेने वाले थे किसान।” वकालत छोड़ गंगा के किनारे सदाक़त आश्रम में अपना निवास रख आंदोलन की धार को और तेज करते रहे । कई बार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष रहे । आजादी जैसे जैसे निकट आ रही थी वैसे दायित्व बढ़ता जा रहा था । सन 1946 में जवाहर लाल नेहरू के नेतृत्व में बारह मंत्रियों के साथ एक अंतरिम सरकार बनी। राजेन्द्र प्रसाद कृषि और खाद्य मंत्री नियुक्त हुए। जुलाई सन् 1946 में हमारा संविधान बनाने के लिए एक संविधान सभा का संगठन किया गया। राजेन्द्र प्रसाद को इसका अध्यक्ष नियुक्त किया गया था।
भारतीय संविधान सभा का प्रथम अधिवेशन 9 दिसम्बर सन् 1946 को हुआ। संविधान सभा के परिश्रम से 26 नवम्बर सन् 1949 को भारत की जनता ने अपने को संविधान दिया जिसका आदर्श था न्याय, स्वाधीनता, बराबरी और बन्धुत्व और सबसे ऊपर राष्ट्र की एकता जिसमें कुछ मूलभूत अधिकार निहित हैं। भविष्य में भारत के विकास की दिशा, पिछड़े वर्ग, महिलाओं की उन्नति और विशेष क्षेत्रों के लिए विशेष प्रावधान हैं। जिससे व्यक्ति की प्रतिष्ठा और अंतर्राष्ट्रीय शान्ति को बढ़ावा देना भी सम्मिलित है। भारत 26 जनवरी सन् 1950 में गणतंत्र बना और राजेन्द्र प्रसाद उसके प्रथम राष्ट्रपति बने।

आज राजेन्द्र बाबू की जयंती के मौके पर बिहार बोर्ड मेघा दिवस मना रहा है । बिहार बोर्ड की ओर से मैट्रिक-इंटर परीक्षा 2018 के टॉपरों का सम्मान समारोह आयोजित है जिसमे मैट्रिक इंटर के टॉपर करीब 45 छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया जाएगा।

आज का दिन एक 19 साल के लडके का जज्बा हौसला और देशभक्ति की परकाष्ठा का है जिसने हँसते हँसते फाँसी को गले मे वरण कर लिया । आज उस महान धरती पुत्र खुदीराम बोस की जयंती है । नमन ऐसे वीर को अश्रु पूर्ण श्रद्धांजलि । उनके साहसिक योगदान को अमर करने के लिए गीत रचे गए और इनका बलिदान लोकगीतों के रूप में मुखरित हुआ। उनके सम्मान में भावपूर्ण गीतों की रचना हुई, जिन्हें लोक गायक आज भी गाते हैं।

आज बिहार की मिट्टी से जन्मे एक और महान सपूत की जयंती है वह है नंदलाल बोस या नंदलाल बसु , जिनका जन्म 3 दिसम्बर, 1882 को मुंगेर में हुआ था । बोस भारत के एक प्रसिद्ध चित्रकार थे उन्होंने ही संविधान की मूल प्रति का डिजाइन बनाया था। इनके प्रसिद्ध चित्रों में है–‘डांडी मार्च’, ‘संथाली कन्या’, ‘सती का देह त्याग’ इत्यादि है। नंदलाल बोस ने चित्रकारों और कला अध्यापन के अतिरिक्त इन्होंने तीन पुस्तिकाएँ भी लिखीं- रूपावली , शिल्पकला और शिल्प चर्चा। ये अवनीन्द्रनाथ ठाकुर के प्रख्यात शिष्य थे।

आज भारतीय हॉकी के श्रेष्ठतम कालजयी खिलाडी मेजर ध्यानचंद की पुण्यतिथि है ।मानना होगा कि हॉकी के खेल में ध्यान चन्द ने लोकप्रियता का जो कीर्त्तिमान स्थापित किया, उसके आसपास भी आज तक दुनिया का कोई खिलाड़ी नहीं पहुँच सका। मेजर ध्यान चन्द रात में भी बहुत अभ्यास करते थे, इसलिए उन्हें उनके साथी खिलाड़ियों द्वारा उपनाम ‘चांद’ दिया गया। दरअसल, उनका यह अभ्यास चांद के निकल आने पर शुरू होता था। 1979 में दादा ध्यानचंद की कोमा में जाने के बाद मौत हुई, लेकिन जब तक वे होश में रहे, भारतीय हॉकी के प्रति चिंतित रहे।हॉकी में ध्यानचंद सा खिलाड़ी न तो हुआ है और न होगा। वह जितने बडे़ खिलाड़ी थे उतने ही नेकदिल इंसान थे। हॉकी के इस जादूगर का असली नाम ध्यानसिंह था, लेकिन जब फ़ौज में उन्होंने बाले तिवारी के मार्गदर्शन में हॉकी संभाली तो सभी स्नेह से उन्हें ध्यानचंद कहने लगे और इस तरह उनका नाम ही ध्यानचंद पड़ गया।पुण्यतिथि पर नमन ।

आज ही भारतीय सिनेमा के सदाबहार अभिनेता चर्चित निर्माता-निर्देशक देव आनन्द की पुण्यतिथि है । वह बॉलीवुड में ‘देव साहब’ के नाम से एक ज़िन्दादिल और भले इंसान के रूप में प्रसिद्ध थे। भारतीय सिनेमा में दो पीढ़ियों तक लगातार हीरो बने रहने वाले कलाकार के विषय में यदि विचार करें तो केवल एक ही नाम उभरता है और वह है देव आनंद। कभी अपनी एक फ़िल्म में उन्होंने एक गीत गुनगुनाया था ‘मैं ज़िंदगी का साथ निभाता चला गया, हर फ़िक्र को धुंए में उड़ाता चला गया’ और शायद यही गीत उनके जीवन को सबसे अच्छी तरह परिभाषित भी करता है। पुण्यतिथि पर नमन ।

आज भोपाल त्रासदी के 34 साल गुजर चुके है । यह दुनिया के औद्योगिक इतिहास की सबसे बड़ी दुर्घटना के नाम से जाना जाता है जिसमे मरने वालों की वास्तविक संख्या आज भी अबूझ पहेली है । लेकिन दावा करने वालो की माने तो यह आंकड़ा 30 हजार के पार था ।
जानिए उस रात को हुए गैस के रिसाव से लेकर हजारों लोगों की मौत तक का पूरा घटनाक्रम।

2 दिसंबर रात 8 बजे: यूनियन कार्बाइड कारखाने की रात की शिफ्ट दो दिसंबर 1984 की रात आठ बजे पहुंच गई थी और सुपरवाइजर समेत सभी मजदूर अपने-अपने काम में लग गए थे ।

2 दिसंबर रात 9 बजे: रात के करीब 9 बजे सफाई कर्मचारी सफाई करने के लिए निकलते हैं. कुछ लोग भूमिगत टैंक के पास पाइपलाइन की सफाई करने के लिए जाते हैं ।

2 दिसंबर रात 10 बजे: सफाई के बाद रात 10 बजे फैक्ट्री के टैंक नंबर 610 में मिथाइल आइसोसाइनेट गैस में पानी भर गया । जिससे रासायनिक प्रतिक्रिया शुरू हो गई । इसी दरमियान टैंक का तापमान 200 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया और टैंक में गैस बनने लगी ।

2 दिसंबर रात साढ़े 10 बजे: रासायनिक प्रतिक्रिया से बने दबाव को टैंक सह नहीं पाया और गैस का रिसाव होने लगा । सफाई के दौरान वाल्व ठीक से बंद नहीं हो सका था । जिसके चलते टॉवर से गैस का रिसाव शुरू हुआ ।

3 दिसंबर रात 12 बज कर 15 मिनट: टैंक में मौजूद कर्मचारियों को रात करीब 12 बज कर 15 मिनट पर घबराहट महसूस होने लगी ।कर्मचारियों ने वॉल्व बंद करने की कोशिश की तभी खतरे का सायरन बज गया । कई रिपोर्ट्स के मुताबिक सायरन रिसाव के काफी देर बाद बजा. जिसके कारण लोग समय रहते सतर्क नहीं हो सके थे ।

3 दिसंबर रात 12 बज कर 50 मिनट: रात 12 बज कर 50 मिनट पर आस-पास की बस्तियों में रहने वाले लोगों को भी घुटन महसूस होने लगी। लोगों को खांसी, आंखों में जलन, पेट फूलने और उल्टी की शिकायत होने लगी थी ।

3 दिसंबर रात 1 बजे: 2 और 3 दिसंबर की रात करीब 1 बजे पुलिस सतर्क हो पाती कि इलाके में भगदड़ मच गई । इसी दरमियान कारखाने के संचालक ने किसी भी प्रकार के रिसाव का खंडन किया ।

3 दिसंबर रात 2 बजे: तीन दिसंबर तड़के 2 बजे अस्पताल में मरीजों की भीड़ उमड़ पड़ी थी। लोग तबीयत बिगड़ने के कारण घरों से बाहर की तरफ भाग रहे थे ।

3 दिसंबर रात 2  बजे: रात सवा दो बजे तक पूरे शहर में जहरीली गैस फैल चुकी थी ।

3 दिसंबर तड़के 4 बजे: तीन दिसंबर तड़के चार बजे तक गैस रिसाव पर काबू पा लिया गया था। लेकिन तब तक लाखों लोग इस जहरीली गैस के मरीज बन चुके थे तो हजारों दम तोड़ चुके थे।

3 दिसंबर सुबह 6 बजे: पुलिस की गाड़ियां लाउडस्पीकर पर गैस के रिसाव की चेतावनी दे रही थीं । वहीं हजारों गैस पीड़ित लोग सड़कों पर दम तोड़ रहे थे तो कुछ लोग बदहवास होकर इधर-उधर भाग रहे थे ।

सुबह होने तक गैस के रिसाव पर तो काबू पा लिया गया ।लेकिन रात भर में गैस इतना नुकसान कर चुकी थी कि हजारों लोग मौत के शिकार हो गए थे ।

आज अन्तरराष्ट्रीय विकलांग दिवस है , इस का उद्देश्य आधुनिक समाज में शारीरिक रूप से अक्षम लोगों के साथ हो रहे भेद-भाव को समाप्त किया जाना है। इस भेद-भाव में समाज और व्यक्ति दोनों की भूमिका रेखांकित होती रही है। भारत सरकार द्वारा किये गए प्रयास में, सरकारी सेवा में आरक्षण देना, योजनाओं में विकलांगो की भागीदारी को प्रमुखता देना, आदि को शामिल किया जाता रहा है। सयुंक्त राष्ट्र संघ ने 3 दिसंबर 1991 से प्रतिवर्ष अन्तरराष्ट्रीय विकलांग दिवस को मनाने की स्वीकृति प्रदान की थी। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 1981 को अन्तरराष्ट्रीय विकलांग दिवस के रूप में घोषित किया था। सयुंक्त राष्ट्र महासभा ने सयुंक्त राष्ट्र संघ के साथ मिलकर वर्ष 1983-92 को अन्तरराष्ट्रीय विकलांग दिवस दशक घोषित किया था।

आज मार्ग शीर्ष मास की कृष्ण एकादशी या उत्पन्ना एकादशी है। एकादशी का व्रत सभी व्रतों में सबसे महत्वपूर्ण है। मार्गशीर्ष मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को उत्पन्ना एकादशी का व्रत किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, एकादशी एक देवी है, जिनका जन्म भगवान विष्णु से हुआ था। मार्गशीर्ष मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को देवी एकादशी प्रकट हुई थीं इसलिए इस एकादशी का नाम उत्पन्ना एकादशी हुआ। पद्मपुराण के अनुसार इस एकादशी के व्रत से धन-धान्य का लाभ और मोक्ष की प्राप्ति होती है। कहा जाता है जो भक्त सच्चे मन और साफ हृदय से इस एकादशी का व्रत करते हैं, उन्हें बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है। आप सभी पर भगवान विष्णु की कृपा बनी रहे आप सभी का आज सोमवार का दिन सर्वाधिक मनोकूल और पूरा सप्ताह सर्वश्रेष्ठ हो ।
।।जय श्री राम ।।

आलेख : अर्चना राय भट्ट – टिकारी गया / 3-12-18