उमीदों के सागर से उगते भास्कर के साथ मंगलमय सुप्रभात ..

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आलेख : अर्चना राय भट्ट , 6 / 11 / 18 – पटना

उमीदों के सागर से उगते भास्कर के साथ मंगलमय सुप्रभात ..

आज छोटी दीपावली है , छोटी ही सही किन्तु इसकी जो तीव्रता है वह जैसे जैसे साम ढलेगी दीपो की प्रकाश पुंज रौशनिया बिखेरगी और उसकी रौशनी की तेज पूरे देश मे कौतूहल का केंद्र बनेगी । उमीद कर सकते है कि वर्षो वर्ष के बेकरारी की कुछ तड़प कम होगी । लाखो दियो के प्रकाश से दमकती रामनगरी से आस्था और विश्वास की लौ उस उम्मीदों पर खरी उतर सकती जिस करोड़ो उमीद के सहारे तख्तों ताज मिला है ।
भगवान राम सबके प्यारे है दुलारे है आपके भी मेरे भी , हम सभी चाहते आज टिमटिमाते दियो की उर्या से इतनी शक्ति उतपन्न हो की तख्ते ताज को चंद पल भी देर करना न पड़े ।


आज पूरे देश मे छोटी दीपावली मन रही है किंतु अयोध्या की छटा ही आज निराली होगी । सरयु नदी के तट पर प्रकाशमान लाखों दीये सालो से छाए अंधियारे को भष्म कर देने की मद्दा रखती है और उमीद भी है हालात भी है और मांग भी है ।
डर संकोच और कुतर्क का समय कब का बीत चुका है अब समय आ चुका है जब करोड़ो और अरबो लोगो के द्वारा अपने अंदर समेटी गई आस्था को हाशिल करना होगा ।

त्रेतायुग में जिस तरह भागवान श्रीराम लंका विजय के पश्चात अयोध्या पहुंचे थे और अयोध्यावासियों ने पूरी अयोध्या नगरी को दीयों से जगमगाकर दीपावली का पर्व मनाया था उसी के साथ पूरे देश मे दीपो का पर्व मनाया जाने लगा उमीद कर सकते है कि आज अयोध्या से निकला प्रकाश पुंज कल पूरे देश मे एक नई दीपावली का आगाज और आयाम प्रस्तुत कर सकता है । चलिए इंतेजार करते दियो से निकलती उर्या किस स्तर पर इस महान देश को प्रकाशित कर पाती है ।

आज न कोई इतिहास की बात करूंगी न कुछ और बस वर्तमान की उमीदों पर चहु दिशाओं से प्रकाशित हो रही उर्या को महसूस करते हुए दिल दिमाग मे श्री राम के टाट से निकल कर आलीशान भवन में बिराजमान होने की आस में उठाई गई पहल का इंतजार करूंगी । आप सब भी भरोषा रखे राम सिर्फ एक नाम नही एक मर्यादा पुरुषोत्तम इंसान नही बल्कि श्री राम तो जीने की आस है वह आती जाती साँसों की डोर है ।

चलिए जोर से बोलिये जय श्री राम , आप सबका मंगल ही मंगल होगा ।