मंगलमय सुप्रभात शुभ सप्ताहांत

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आलेख : अर्चना राय भट्ट / 3-11-2018 

मंगलमय सुप्रभात शुभ सप्ताहांत

5 अक्तूबर, 1923 को अत्यंत साधारण व अभावग्रस्त परिवार में जन्म लेने के बावजूद अपने आदर्शों और मेहनत के द्वारा अपनी पार्टी को दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बनाने की राह पर भीष्म पितामह की तरह स्थायित्व प्रदान करने में अग्रणी भूमिका निभा कर आज ही के दिन 2012 को दुनिया से अलबिदा होने वाले श्रधेय कैलाशपति मिश्र जी को अश्रुपूर्ण नमन ।
कभी सक्रिय, उच्चस्तरीय व सत्ता के इर्द-गिर्द घूमती राजनीतिक यात्रा में कभी न डिगने वाले न कभी विचलित होने वाले भारतीय जनता पार्टी के संस्थापकों में से एक अपने आदर्श आचरण और निर्मलता से अपने आपको , अपनी पार्टी को आसमान की बुलंदियों पर स्थापित कर एक नई मिसाल कायम करने वाले भाजपा के “भीष्म पितामह” श्रधेय कैलाशपति मिश्र जी की पुण्यतिथि पर भाव भीनी श्रद्धांजलि ।
पांच दसको से अधिक लम्बी चली उनकी राजनीतिक जीवन की यात्रा में न उन पर कोई आरोप लगा और न ही वे किसी विवाद का अंग बने। राजनीति की दलदल में कमल के समान अहंकार, बुराई, द्वेष, लोभ-लालच आदि सामान्य दोषों से भी अछूते रहने वाले श्रधेय कैलाशपति जी अपनी इन्हीं विशिष्टताओं के कारण भारतीय जनता पार्टी और उसके कार्यकर्ताओं के लिए सदा आदर्श एवं प्रेरणास्रोत बने रहेंगे।

संघ प्रचारक के रूप में आरा से सामाजिक जीवन प्रारंभ किया, पटना में प्रचारक रहे, पूर्णिया के जिला प्रचारक रहे , जनसंघ के प्रदेश संगठन मंत्री रहे , विक्रम विधानसभा से चुनाव जीत कर कर्पूरी ठाकुर की सरकार में वित्त मंत्री भी रहे। 1980 में भारतीय जनता पार्टी की बिहार इकाई के वे पहले प्रदेश अध्यक्ष मनोनीत हुए, 1983 से 1987 तक निर्वाचित अध्यक्ष रहे। 1984 से 1990 तक राज्यसभा के भी सदस्य रहे। 2004 में गुजरात के राज्यपाल रहते हुए 4 माह के लिए राजस्थान के राज्यपाल का कार्यभार भी उन पर था।

आपने आप को राष्ट्र और समाज की सेवा को ही अपना सबकुछ मान कर आजीवन अविवाहित रहकर अपने समाज की सेवा का जो संकल्प 1945 में उन्होंने लिया, उसे आज के दिन 2012 तक निभाया । ऐसे महान देवतयतुल्य आत्मा सिर्फ भाजपा परिवार ही नही अपितु हिंदुस्तान की राजनीति में हर इंसान के लिए सदा श्रधेय और मार्गदर्शक रहेंगे , एक बार फिर मैं अश्रुपूर्ण श्रद्धा सुमन उनके चरणों मे अर्पित करती हूं ।

चार दिनां दा प्यार हो रब्बा बड़ी लंबी जुदाई बिछड़े अभी तो हम बस कल परसो जिऊंगी मैं कैसे, इस हाल में बरसो….
ओ हो हो हो हो हो लाल मेरी पत रखियो बला झूले लालण ओ लाल मेरी पत रखियो बला झूले लालण सिंदड़ी दा सेवण दा सखी शाह बाज़ कलन्दर दमादम मस्त कलन्दर अली दम दम दे अन्दर…..

1980 के दशक में सुभाष घई की फिल्म ‘हीरो’ के महज एक गीत ‘लंबी जुदाई…’ ने बंजारन गायिका रेशमा को अमर बना डाला। आज भी यह गीत जब कानों में गूंजता है तो लब खुद-ब-खुद इस गीत के साथ ताल बैठाने की जुर्रत कर बैठते हैं। शायद ही ऐसा कोई रसिक श्रोता हो जिसके दिल तक यह गीत नहीं पहुंचा हो।

1947 में राजस्थान के बीकानेर में एक बंजारा परिवार में जन्मी रेशमा लोक गायकी के लिए मशहूर रहीं। भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद उनका परिवार कराची जाकर बस गया।

1960 के दशक से ही पाकिस्तान की टीवी पर गाने लगी थीं। उनकी आवाज़ में ‘दमा दम मस्त कलंदर’, ‘हाय ओ रब्बा नइयों लगदा दिल मेरा’ और ‘अंखियां नू रहण दे’ जैसे गाने लोगों की जुबान पर चढ़ गए। राजकपूर ने तो फ़िल्म बॉबी में ‘अंखियां नू रहण दे’ की तर्ज का इस्तेमाल करते हुए लता मंगेशकर से ‘अंखियों को रहने दे, अंखियों के आस-पास’ गाना भी गवाया।
एक दौर ऐसा भी आया जब रेशमा आर्थिक परेशानियों में घिर गईं। तब पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति और संगीत प्रेमी परवेज मुशर्रफ ने उन्हें दस लाख रुपये दिए ताकि वह अपना ऋण चुका सकें। बाद में मुशर्रफ ने रेशमा के लिए प्रति माह 10,000 रुपये की सहायता भी निर्धारित कर दी।

3 नवंबर 2013 की सुबह यदि पाकिस्तानी उच्चायोग रेशमा के निधन की खबर पर मुहर नहीं लगाता तो कोई नहीं जान पाता कि ‘लंबी जुदाई’ गीत गाने वाली यह गायिका हमेशा-हमेशा के लिए खामोश हो गई है… हम सबसे उनकी सदा के लिए जुदाई हो गई है… 66 बरस की उम्र में रेशमा ने अपनी जिंदगी में सिर्फ शोहरत ही बटोरी… वह अन्य चालाक गायकों की तरह न तो ‍तिजोरी में रुपए भर सकी और न उसके दिमाग में इस तरह की फितरत आई।

पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने उन्हें ‘सितारा ए इम्तियाज’ और ‘लीजेंड्स ऑफ पाकिस्तान’ सम्मान प्रदान किया था। उन्हें और भी कई राष्ट्रीय सम्मान मिले थे। भारत और पाकिस्तान के कलाकारों को जब 1980 के दशक में एक दूसरे के यहां अपनी प्रस्तुति देने की अनुमति मिली, रेशमा ने भारत में लाइव परफार्मेन्स दिया था। फ़िल्म निर्माता सुभाष घई ने उनकी आवाज़़ को अपनी फ़िल्म ‘हीरो’ में इस्तेमाल किया था और वह गीत ‘लंबी जुदाई’ था जिसे आज भी श्रोता पसंद करते हैं।

3 नवम्बर 1957 को रूस (सेवियत संघ) ने पहले जीवित प्राणी को अंतरिक्ष में भेजा था, जो एक रूसी कुतिया(नाम – लाइका) थी। लाइका को ‘स्पूतनिक-2’ नामक उपग्रह से भेजा गया था।
इसे ‘बैकानूर अंतरिक्ष स्टेशन’ से अंतरिक्ष भेजा गया था।

आज ही के दिन 3 नवम्बर 1947 को ही सोमनाथ शर्मा का निधन हुआ था।सोमनाथ शर्मा ‘परमवीर चक्र’ पाने वाले प्रथम भारतीय शहीद थे।

अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश तीन नवंबर 2004 को दूसरी बार अमरीका के राष्ट्रपति चुने गए थे । उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जॉन केरी पर आसान जीत दर्ज की थी। जॉर्ज बुश को 51 फ़ीसदी मत मिले थे, जबकि जॉन केरी को 48 प्रतिशत लोगों ने पसंद किया था ।

3 नवंबर 1948 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में पहला भाषण दिया था।

भारत के सबसे कुख्यात और क्रूर मुस्लिम शासक औरंगजेब का जन्म 3 नवम्बर 1618 को हुआ था यानी आज से 400 साल पहले । औरंगजेब ऐसा क्रूर शासक था जिसने सत्ता के लिए अपने ही भाइयो  और भतीजो की निर्मम हत्या करवाई थी और अपने पिता को ही कैद कर लिया था। सिर्फ यही नही औरंगजेब के दौर में सैकड़ो हिन्दू मन्दिरो को तोड़कर वहाँ मस्जिद बना दी गयी, इस्लाम स्वीकार ना करने वाले गैर मुस्लिमो को सामुहिक निर्मम हत्याएं की गई।

पृथ्वीराज कपूर हिंदी सिनेमा जगत एवं भारतीय रंगमंच के प्रमुख स्तंभों में गिने जाते हैं। पृथ्वीराज ने बतौर अभिनेता मूक फ़िल्मो से अपना करियर शुरू किया। उन्हें भारतीय जन नाट्य संघ के संस्थापक सदस्यों में से एक होने का भी गौरव हासिल है। पृथ्वीराज कपूर का जन्म आज ही के दिन 1906 में हुआ था ।

भारत का मशहूर अखबार टाइम्स ऑफ़ इंडिया की शुरुआत साप्ताहिक अख़बार के रूप में हुई थी, जिसका पहला एडिशन 3 नवम्बर, 1838 में The Bombay Times और Journal of Commerce के रूप में निकला था । 1850 में इसे डेली न्यूज़पेपर की शक़्ल दी गई । तब से लेकर अब तक टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने न जाने कितनी ही ख़बरों को देखा और छापा, ये कहना गलत नहीं होगा कि टाइम्स ऑफ़ इंडिया अपने आप में भारत का एक इतिहास है । इतिहास को समेटे इसी अख़बार की आज हम आपके लिए एक तस्वीरें लेकर आये हैं, जो पुराने समय के टाइम्स ऑफ़ इंडिया की झलक दिखाती हैं।


आज कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की एकादशी तिथि है जिसे रमा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन व्रत रख भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है। मान्यता के अनुसार, इस व्रत के प्रभाव से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं, यहां तक कि ब्रह्महत्या जैसे महापाप भी दूर होते हैं। सौभाग्यवती स्त्रियों के लिए यह व्रत सुख और सौभाग्यप्रद माना गया है। आप सबके लिए भी सुखद कामना करती हूं आज शनिवार का दिन शुभ और सप्ताहांत सर्वश्रेष्ठ हो ।
जय श्री राम ।