मंगलमय सुप्रभात,

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मंगलमय सुप्रभात,
आज 31 ओक्टुबर माह का आखरी दिन , हिंदुस्तान के राजनीतिक इतिहास का अहम दिन जिसका तालुक देश के दो महान नेता सरदार पटेल और इंदिरा गांधी से है । आज एक का जन्मदिन और एक की पुण्यतिथि। दोनों ही देश के लिए प्रेरणा हैं। किससे शुरू करु असमंजस की स्थिति है ,खैर लौहपुरुष से शुरू करती हुँ ।
आज ही के दिन 1875 में जन्मे लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल वास्तव में आधुनिक भारत के शिल्पी थे। उनके कठोर व्यक्तित्व में विस्मार्क जैसी संगठन कुशलता, कौटिल्य जैसी राजनीति सत्ता तथा राष्ट्रीय एकता के प्रति अब्राहम लिंकन जैसी अटूट निष्ठा थी।
सरदार पटेल भारतीय बैरिस्टर और प्रसिद्ध राजनेता थे। भारत के स्वाधीनता संग्राम के दौरान ‘भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस’ के नेताओं में से वे एक थे। 1947 में भारत की आज़ादी के बाद पहले तीन वर्ष वे उप प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, सूचना मंत्री और राज्य मंत्री रहे थे। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद क़रीब पाँच सौ से भी ज़्यादा देसी रियासतों का एकीकरण एक सबसे बड़ी समस्या थी। कुशल कूटनीति और ज़रूरत पड़ने पर सैन्य हस्तक्षेप के जरिए सरदार पटेल ने उन अधिकांश रियासतों को तिरंगे के तले लाने में सफलता प्राप्त की। इसी उपलब्धि के चलते उन्हें लौह पुरुष या भारत का बिस्मार्क की उपाधि से सम्मानित किया गया। उन्हें मरणोपरांत वर्ष 1991 में भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ दिया गया। वर्ष 2014 में केंद्र में मोदी जी की सरकार आने के बाद सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती को ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’ के रूप में मनाई जाती है।

भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन को वैचारिक एवं क्रियात्मक रूप में एक नई दिशा देने के कारण सरदार पटेल ने राजनीतिक इतिहास में एक गौरवपूर्ण स्थान प्राप्त किया। जिस अदम्य उत्साह असीम शक्ति से उन्होंने नवजात गणराज्य की प्रारम्भिक कठिनाइयों का समाधान किया, उसके कारण विश्व के राजनीतिक मानचित्र में उन्होंने अमिट स्थान बना लिया। भारत के राजनीतिक इतिहास में सरदार पटेल के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। सरदार पटेल के ऐतिहासिक कार्यों और किये गये राजनीतिक योगदान अहम हैं । उनकी नीतिगत दृढ़ता के लिए ‘राष्ट्रपिता’ ने उन्हें ‘सरदार’ और ‘लौह पुरुष’ की उपाधि दी थी। बिस्मार्क ने जिस तरह जर्मनी के एकीकरण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, उसी तरह वल्लभ भाई पटेल ने भी आज़ाद भारत को एक विशाल राष्ट्र बनाने में उल्लेखनीय योगदान दिया। बिस्मार्क को जहाँ “जर्मनी का आयरन चांसलर” कहा जाता है, वहीं पटेल “भारत के लौह पुरुष” कहलाते हैं।

आज आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी करेंगे दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा ‘स्टेच्यू ऑफ यूनिटी’ का अनावरण । गुजरात में लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के सम्मान में दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा बनाई गई है । 182 मीटर ऊंची इस प्रतिमा को ‘स्टेच्यू ऑफ यूनिटी’ का नाम दिया गया है, जिसका अनावरण आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे । सरदार पटेल की ये मूर्ति नर्मदा जिले में सरदार सरोवर बांध के पास साधु बेट टापू पर बनाई गई है । दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा बताई जा रही ये प्रतिमा अमेरिका के ‘स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी’ से दोगुनी ऊंची है ।

आज इतिहास के पन्नो को पलटने पर दूसरी जो सबसे बड़ी बात दिखती है वह है आयरन लेडी यानी भारत रत्न श्रीमति इंदिरा गांधी जी के बारे में । आज इंदिरा गाँधी को सिर्फ़ इस कारण नहीं जाना जाता कि वह पंडित जवाहरलाल नेहरू की बेटी थीं बल्कि इंदिरा गाँधी अपनी प्रतिभा और राजनीतिक दृढ़ता के लिए ‘विश्वराजनीति’ के इतिहास में जानी जाती हैं और इंदिरा गाँधी को आयरन लेडी यानी ‘लौह-महिला’ के नाम से संबोधित किया जाता है। ये भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री थीं । आज ही के दिन उन्हें गोली मारकर हत्या कर दी गई थी । हत्या की वजह ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद उपजे तनाव के बीच दो सिख अंगरक्षकों ने उनकी गोली मार कर हत्या कर दी थी। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देश मे जबरदस्त हिंसा भड़क गई थी । इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सिखों को निशाना बनाया गया । हिंसक झड़पों में कई बेगुनाह सिख मारे गए और उनके घरों और उनकी दुकानों को आग के हवाले कर दिया गया था । खैर यह एक आवेश था अपने नेता के लिए लेकिन हिंसा का जबाब हिंसा कतई नही होता ।

बात करे इंदिरा जी की तो भारत के जितने भी प्रधानमंत्री हुए , उन सभी की अनेक विशेषताएँ हो सकती हैं, लेकिन इंदिरा गाँधी के रूप में जो प्रधानमंत्री भारत भूमि को प्राप्त हुआ, वैसा प्रधानमंत्री अभी तक दूसरा नहीं हुआ है क्योंकि एक प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने विभिन्न चुनौतियों का मुक़ाबला करने में सफलता प्राप्त की। युद्ध हो, विपक्ष की ग़लतियाँ हों, कूटनीति का अंतर्राष्ट्रीय मैदान हो अथवा देश की कोई समस्या हो- इंदिरा गाँधी ने अक्सर स्वयं को सफल साबित किया। इंदिरा गाँधी, नेहरू के द्वारा शुरू की गई औद्योगिक विकास की अर्द्ध समाजवादी नीतियों पर क़ायम रहीं। उन्होंने सोवियत संघ के साथ नज़दीकी सम्बन्ध क़ायम किए और पाकिस्तान -भारत विवाद के दौरान समर्थन के लिए उसी पर आश्रित रहीं। जिन्होंने इंदिरा गाँधी के प्रधानमंत्रित्व काल को देखा है, वे लोग यह मानते हैं कि इंदिरा गाँधी में अपार साहस, निर्णय शक्ति और धैर्य था।
उनका वास्तविक नाम इंदिरा प्रियदर्शनी गाँधी था , काँग्रेस पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर भारत की तृतीय प्रधानमंत्री बानी जिनका कार्य काल 19 जनवरी, 1966 से 24 मार्च, 1977, 14 जनवरी, 1980 से 31 अक्टूबर, 1984 था । शैक्षणिक रूप से विश्वभारती विश्वविद्यालय बंगाल, इंग्लैंड की ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी, शांति निकेतन से शिक्षा प्राप्त की हुई थी । ऐसी भारत भूमि की महान महिला को शत शत नमन ।

आज राष्ट्रीय एकता दिवस है । लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की स्मृति में उनके जन्मदिन 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में प्रति वर्ष मनाया जाता हैं। राष्ट्रीय एकता दिवस का ऐलान 2014 में किया गया, इसे वल्लभभाई पटेल के राष्ट्र के प्रति समर्पण को याद में रखकर तय किया गया।भारत की गणना विश्व के सबसे बड़े देशों में से एक के रूप में की जाती है जो कि पूरे विश्व में दूसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है, जहाँ 1652 के आसपास भाषाऍ और बोलियाँ बोली जाती है। यह देश दुनिया के सभी प्रमुख धर्मों को जैसे हिंदू, बौद्ध, ईसाई, जैन, इस्लाम, सिख और पारसी धर्मों को विभिन्न संस्कृति, खानपान की आदतों, परंपराओं, पोशाकों और सामाजिक रीति-रिवाजों के साथ शामिल करता है। यह जलवायु में काफी अन्तर के साथ एक विविधतापूर्ण देश है। देश में प्रमुख भिन्नता होने के बाद भी, इसका प्रत्येक भाग एक ही संविधान द्वारा बहुत शांति के साथ नियंत्रित है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देश के तत्कालीन गृह मंत्री के तौर पर लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने ही क़रीब पाँच सौ से भी ज़्यादा देसी रियासतों का एकीकरण सबसे बड़ी समस्या सुलझाई थी।


आज के दिन की अन्य बातों पर ध्यान दे तो आज
अक्टूबर को जन्मे व्यक्ति में सरदार वल्लभ भाई पटेल , नरेन्द्र देव जो भारत के प्रसिद्ध विद्वान, समाजवादी, विचारक, शिक्षाशास्त्री और देशभक्त थे उनका जन्म हुआ । जी. माधवन नायर, भारतीय वैज्ञानिक और ‘इसरो’ के भूतपूर्व अध्यक्ष तथा सर्बानन्द सोनोवाल – असम के 14वें मुख्यमंत्री और भारत की सोलहवीं लोकसभा के सांसद हैं उनका भी जन्मदिन आज ही है ।
वही अगर दुनिया छोड़ने वालो की बात करे तो ।1975 में बंगला और हिन्दी सिनेमा के प्रसिद्ध संगीतकार तथा गायक सचिन देव बर्मन यानी एसडी वर्मन दुनियां से अलबिदा हो गए वही प्रसिद्ध कवयित्री, उपन्यासकार और निबंधकार अमृता प्रीतम का देहान्त 2005 में हुआ ।

आज विक्रम संवत् 2075 कार्तिक कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि दिन बुधवार अहोई अष्टमी व्रत आप सबके मनोकूल हो ।