विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाओ के साथ सुप्रभात

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विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएं

 

आलेख : अर्चना राय भट्ट, पटना :/

तिमिर को वेधती देवी विजया के आभामंडल से प्रफुल्लित सुनहरी किरणों के साथ मंगलमय सुप्रभात, विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएं ।

सनातन काल से शक्ति की उपासना का पर्व शारदेय नवरात्र अनवरत जारी है और युगों युगों तक गतिमान रहेगा । सनातन धर्म के सर्वोच्च पूजनीय मर्यादा पुरुषोत्तम अयोध्या नरेश श्री रामचंद्रजी ने इस शारदीय नवरात्रि पूजा का प्रारंभ समुद्र तट पर किया था और उसके बाद लंका विजय के लिए प्रस्थान किया और विजय प्राप्त की। वही दूसरी तरफ तथा माँ दुर्गा ने नौ रात्रि एवं दस दिन के युद्ध के उपरान्त महिषासुर पर विजय प्राप्त किया था। जब वह लंका जीत सबके साथ अयोध्या पहुंचे उस दिन अश्विन (क्वार) मास के शुक्ल पक्ष की दशमीतिथि थी तभी से असत्य पर सत्य, अधर्म पर धर्म की जीत का पर्व दशहरा मनाया जाता है। आज वही दिन है ।
दशहरा या दसेरा शब्द ‘दश’ (दस) एवं ‘अहन्‌‌’ से ही बना है । इस पर्व को भगवती के ‘विजया’ नाम पर भी ‘विजयादशमी’ कहते हैं। ऐसा भी माना जाता है कि आश्विन शुक्ल पक्ष दशमी तिथि को तारा उदय होने के समय ‘विजय’ नामक मुहूर्त होता है। यह काल सर्वकार्य सिद्धिदायक होता है।इसलिए भी इसे विजयादशमी कहते हैं।

विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएं

दशहरा उत्सव की उत्पत्ति के विषय में कई बाते की गयी हैं। भारत के कई भागों में नये अन्नों की हवि देने, द्वार पर धान की हरी एवं अनपकी बालियों को टाँगने तथा गेहूँ जौ आदि को कानों, मस्तक या पगड़ी पर रखने का विधान वर्णित हैं। कुछ लोगों का मत है कि यह कृषि का उत्सव है। कुछ लोगों के मत से यह रणयात्रा का द्योतक है इसके साथ साथ देश का राष्ट्रीय पर्व भी है ।

बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक दशहरा
रावण, उसके भाई कुम्भकर्ण और पुत्र मेघनाद के पुतले को दहन किये बिना पूरा नही होता । आज कई स्थानों पर शस्त्रों की पूजा होती है, नीलकंठ पक्षी का दर्शन बहुत शुभ माना जाता है। आज के दिन अपराजिता देवी की पूजा होती है। वनस्पतियों के रूप में शमी वृक्ष और अपराजिता के पेड़ को
आदर पूर्वक पूजा किया जाता है । शमी वृक्ष, जिसका पूजन रावण दहन के बाद करके इसकी पत्तियों को स्वर्ण पत्तियों के रूप में घर परिवार मित्र बंधु को ससम्मान रूप से प्रदान किया जाता है। इस परंपरा में विजय उल्लास पर्व की कामना के साथ समृद्धि की कामना करते हैं। वही अपराजिता विष्णु को प्रिय है और प्रत्येक परिस्थिति में सहायक बनकर विजय प्रदान करने वाला है।

देश में अलग अलग तरीक़े से मनाया जाता है। बंगाल और मध्य भारत के अलावा दशहरा पर्व देश के अन्य राज्यों में क्षेत्रीय विषमता के बावजूद एक समान उत्साह और शौक़ से मनाया जाता है। उत्तरी भारत में रामलीला के उत्सव दस दिनों तक चलते रहते हैं और आश्विन माह की दशमी को समाप्त होते हैं, जिस दिन रावण एवं उसके साथियों की आकृति जलायी जाती है। इसके अतिरिक्त इस अवसर पर और भी कई प्रकार के कृत्य होते हैं, यथा हथियारों की पूजा, दशहरा या विजयादशमी से सम्बंधित वृत्तियों के औज़ारों या यंत्रों की पूजा होती है ।

विजयादशमी के दस सूत्र

दस इन्द्रियों पर विजय का पर्व है।
असत्य पर सत्य की विजय का पर्व है।
बहिर्मुखता पर अंतर्मुखता की विजय का पर्व है।
अन्याय पर न्याय की विजय का पर्व है।
दुराचार पर सदाचार की विजय का पर्व है।
तमोगुण पर दैवीगुण की विजय का पर्व है।
दुष्कर्मों पर सत्कर्मों की विजय का पर्व है।
भोग पर योग की विजय का पर्व है।
असुरत्व पर देवत्व की विजय का पर्व है।
जीवत्व पर शिवत्व की विजय का पर्व है।

आज के दिन लोग शस्त्र-पूजा करते हैं और नया कार्य प्रारम्भ करते हैं (जैसे अक्षर लेखन का आरम्भ, नया उद्योग आरम्भ, बीज बोना आदि)। ऐसा विश्वास है कि इस दिन जो कार्य आरम्भ किया जाता है उसमें विजय मिलती है।

दशहरा अथवा विजयदशमी भगवान राम की विजय के रूप में मनाया जाए अथवा दुर्गा पूजा के रूप में, दोनों ही रूपों में यह शक्ति-पूजा का पर्व है, शस्त्र पूजन की तिथि है। हर्ष और उल्लास तथा विजय का पर्व है। भारतीय संस्कृति वीरता की पूजक है, शौर्य की उपासक है। व्यक्ति और समाज के रक्त में वीरता प्रकट हो इसलिए दशहरे का उत्सव रखा गया है। दशहरा का पर्व दस प्रकार के पापों- काम, क्रोध, लोभ, मोह मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी के परित्याग की सद्प्रेरणा प्रदान करता है।

हमारे देश में हिमाचल प्रदेश के कुल्लू का दशहरा बहुत प्रसिद्ध है। वहाँ रघुनाथजी की पूजा अर्चना से दशहरे के उत्सव का आरंभ होता हैं और वह आज दशमी के दिन इस उत्सव की शोभा यात्रा निकाली जाती है जो बहुत ही निराली होती है।

कर्नाटक में मैसूर का दशहरा भी पूरे भारत में प्रसिद्ध है। मैसूर में दशहरे के समय पूरे शहर की गलियों को रोशनी से सज्जित किया जाता है और हाथियों का शृंगार कर पूरे शहर में एक भव्य जुलूस निकाला जाता है।

बिहार , बंगाल, ओडिशा और असम में यह पर्व दुर्गा पूजा के रूप में ही मनाया जाता है। यहाँ  के लोगों का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार है।
तमिल नाडु, आंध्र प्रदेश एवं कर्नाटक में दशहरा नौ दिनों तक चलता है जिसमें तीन देवियां लक्ष्मी, सरस्वती और दुर्गा की पूजा करते हैं।
गुजरात में मिट्टी सुशोभित रंगीन घड़ा देवी का प्रतीक माना जाता है और इसको कुंवारी लड़कियां सिर पर रखकर एक लोकप्रिय नृत्य करती हैं जिसे गरबा कहा जाता है।
महाराष्ट्र में नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा को समर्पित रहते हैं, जबकि दसवें दिन ज्ञान की देवी सरस्वती की वंदना की जाती है।
बस्तर में दशहरे के मुख्य कारण को राम की रावण पर विजय ना मानकर, लोग इसे मां दंतेश्वरी की आराधना को समर्पित एक पर्व मानते हैं। दंतेश्वरी माता बस्तर अंचल के निवासियों की आराध्य है ।
नेपाल में विजयादशमी के दिन बड़ों के सामने नतमस्तक होकर उनका आशीर्वाद लेने की परम्परा है।

आप सब से जुडी है हमारी संस्कृति जो सदा से ही वीरता व शौर्य की समर्थक रही है। आपसब में वीरता का प्रादुर्भाव हो इसके लिए दशहरे का यह समय उपयुक्त मना गया है।आप सब का जिंदगी से जारी संघर्ष में युद्ध अनिवार्य ही हो जाय तब शत्रु के आक्रमण की प्रतीक्षा ना कर उस पर हमला करने की तैयारी के रूप में तथा असत्य पर सत्य, अधर्म पर धर्म की जीत का पर्व आप सबके जिंदगी को खुशिये से भर दे । यही मंगलकारी कामना करती हूं आप सबका दिन शुभ हो ।