श्री राम पर अपनी जान अर्पण करने वाले कलियुगी हनुमानो को रोमरोम से अभिनन्दन के साथ शुभ सुप्रभात

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श्री राम पर अपनी जान अर्पण करने वाले कलियुगी हनुमानो को रोमरोम से अभिनन्दन के साथ शुभ सुप्रभात ।आलेख :अर्चना राय भट्ट / ६ दिसंबर २०१८ / पटना

आज 6 दिसंबर है , साल के प्रत्येक दिन का अपना महत्व और उसका इतिहास होता है वैसे आज का भी है । शायद वर्ष भर में ऐसा कोई और ही दिन होगा जिसकी चर्चा इतनी होती होगी ।
आज का दिन अयोध्या में श्री राम के मंदिर निर्माण से जुड़ा इतिहास है तो सविधान निर्माता श्री बाबा साहब अंबेडकर के महाप्रयाण का दिन है वही आज होमगार्ड स्थापना दिवस भी है ।

लेकिन बात करे श्रीराम के मंदिर से तो यही कारण है कि यह दिन पूरे वर्ष में खास बन जाता है । बात मंदिर की या मस्जिद की नही उससे ज्यादा इस पर हुई राजनीति से है । कभी किसी ने दृढ़ इच्छाशक्ति से इस मसले को सुलझाने का प्रयास नही किया , सबने अपने अपने राजनीतिक फायदे के अनुसार श्री राम जन्मस्थली – श्री राम – अयोध्या – विवादित ढांचे – अतिक्रमित स्थल को एक मोहरा बनाया । अगर ऐसा नही हुआ होता तो आज श्री राम के जन्मस्थली पर भव्य मंदिर बन गया होता और यह मसला कब का खत्म हो चुका होता । कभी मजबूरियों का रोना रोया गया तो कभी कानून की पेचिन्दगीयो में उलझा कर गली गली घुमाते हुए तारीख पर तारीख आगे सरकाता गया , तो किसी ने सर्व धर्म मे एकता अंखडता की बात करके इसे धीरे धीरे सुलगाते रखा । किसी को कुर्सी का डर तो किसी को वोट की चिंता किसी ने इसे अपना सहारा बनाया तो किसी ने इसको मोहरा बनाया । सबने राम के नाम पर वोट की भीख मांगी और श्री राम भी एक अबोध बालक के जैसा देखते रहे सब पर अपना पूर्ण आशीर्वाद बनाये रखे । जब जिसने उनके नाम का सहारा लिया तब उसे उन्होंने जमीन से आसमान तक पहुचाया लेकिन मिला क्या ?
यह मसला इतना मुश्किल भी नही की इसे सुलझाया न जा सके अगर इसमे से राजनीति को परे करके देखे तो ।
आम इंसान को क्या चाहिए ? शारिरिक शकुन मानसिक शांति और आर्थिक मजबूती । इससे अधिक आम इंसान की जरूरते नही होती , हाँ इसमे जब भी राजनीति जुड़ जाती तो इन पक्षो की अहमियत से हट कुछ पल के लिए उस भवर में आम इंसान फस जाता और फिर उसे ऐसे विवादों के निर्माण में एक मोहरे के रूप में इस्तेमाल किया जाता है ।
यह पूरे विश्व को पता है कि दुनिया के 10 क्रूर शासकों को क्रमबद्ध किया जाय तो बाबर का स्थान अहम होगा । भारत पर मात्र चार वर्ष ( 1526 -1530 ) उसका शाशनकाल रहा , लेकिन इतना ही दिन में उसने और उसके सिपाहियों ने आपने कौम की हमदर्दी पाने के लिए अन्य धर्म के लोगों खासकर हिंदुओं का नरसंहार ही नहीं किया, बल्कि अनेक हिन्दू मंदिरों को भी नष्ट किया । उसके एक अधिकारी ने संभल में एक मंदिर को गिराकर मस्जिद का निर्माण करवाया । उसके सदर शेख जैना ने चन्देरी के अनेक मंदिरों को नष्ट किया । यहां तक माना जाता है कि बाबर की आज्ञा से मीर बाकी ने 1528 में अयोध्या में राम जन्मभूमि पर निर्मित प्रसिद्ध मंदिर को नष्ट कर मस्जिद बनवाई थी । यही नहीं ग्वालियर के निकट उरवा में अनेक जैन मंदिरों को भी नष्ट किया था । यह कहना गलत नहीं होगा कि क्रूर बाबर का भारत पर आक्रमण हर तरह से महमूद गजनवी या मोहम्मद गौरी जैसा ही थी, जिन्होंने अपने हितों के खातिर किसी भी प्रकार के नरसंहार को सही माना ।
1528 से लेकर 6 दिसंबर 2018 तक सबने इसे अपनी जरूरतें और अपनी सहूलियत के अनुसार प्रयोग किया। बाबर ने अपनी राजनीतिक स्थिति को मज़बूत करने के लिए इसे चुना तो अलग अलग संस्थाओं , व्यक्तियों ने इसे समय समय पर सीढ़ी के रूप में प्रयोग किया ।
6 दिसंबर 1992 का दिन एक अहम दिन था जब आम इंसान के मनःस्थिति को समझते हुए , खुद के व्यक्तित्व में आस्था की संवेदना से बोझिल किंतु राजनीतिक फायदे के लिए आज के दिन को इतिहास में परिवर्तित होने दिया गया , सैकड़ो राम भक्तों ने अपनी जान अर्पण कर दी लेकिन परिणाम सिफर का सिफर ।
लेकिन एक बात तो तय है जिसने भी श्री राम को छला उसने कुछ पल के लिए तो अपने सवार्थ सिद्धि में सफलता पाई लेकिन दुबारा कभी उसने वह मुकाम नही हासिल कर सकी । आप इतिहास को बारीकी से देखे तो आईने जैसा साफ दिखेगा ।
खैर इन सब बातों को किताबी सीमाओं तक ही रखें तो ज्यादा बेहतर होता है ।
मेरी अपनी सोच है 6 दिसंबर एक ऐतिहासिक दिन था , अवैध रूप से अतिक्रमित स्थल को मुक्ति के लिए स्वर्णिम पल था । अफसोस है उस वक्त मैं शामिल नही हो सकी ।
आज के दिन सैकड़ो कलियुगी हनुमान श्री राम भक्तों ने अपनी जान श्री राम के चरणों मे अर्पण कर कर दी उन्हें रोम रोम से अभिनन्दन ।
।। जय श्री राम ।।

राम बनवास से जब लौटकर घर में आए
याद जंगल बहुत आया जो नगर में आए
रक्से-दीवानगी आंगन में जो देखा होगा
छह दिसम्बर को श्रीराम ने सोचा होगा
इतने दीवाने कहां से मेरे घर में आए

आज 6 दिसंबर बाबा साहेब डॉ भीमराव रामजी अम्बेडकर का 63वाँ महापरिनिर्वाण दिवस है ।
डॉ भीमराव रामजी अम्बेडकर की मृत्यु 6 दिसम्बर 1956 को हुई थी यही कारण है कि डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर महापरिनिर्वाण दिन या पुण्यतिथि हर साल उन्हें 6 दिसम्बर को श्रद्धांजलि और सम्मान देने के लिये मनाया जाता है। उन्हें, “भारतीय संविधान का जनक” कहा जाता है। देश भर से लोगों की एक बड़ी भीड़ भारत के संविधान के महान वास्तुकार, डॉ बाबासाहेब अंबेडकर के लिए श्रद्धा अर्पण करने के लिए दादर में “चैत्य भूमि” (डॉ अम्बेडकर के स्मारक) पर श्रद्धा सुमन अर्पित करते है । भीमराव रामजी आम्बेडकर, बाबासाहब आम्बेडकर नाम से लोकप्रिय, भारतीय बहुज्ञ, विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ, और समाजसुधारक थे। उन्होंने दलित बौद्ध आंदोलन को प्रेरित किया और अछूतों से सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध अभियान चलाया था। श्रमिकों, किसानों और महिलाओं के अधिकारों का समर्थन भी किया था। डॉ अंबेडकर के महापरिनिरवाण दिवस पर उन्‍हें श्रद्धांजलि। राष्‍ट्र के प्रति उनका योगदान बहुमूल्‍य और उल्‍लेखनीय है। वे ऐसे व्‍यक्‍ति थे जो समय से आगे चला करते थे। सामाजिक बुराईयों को दूर करने के उनके प्रयासों और उनके द्वारा शिक्षा को दिये गये महत्‍व का हम स्मरण करते हैं। डॉ अम्‍बेडकर दलितों और शोषितों की आवाज बन गये थे। उनकी सोच और आदर्श हमें समानता पर आधारित समाज बनाने में मार्ग दर्शक बने रहेंगे।

आज 6 दिसंबर होमगार्ड का 72वां स्थापना दिवस है । होमगार्ड भारत की पैरामिलिट्री फोर्स है यह एक स्वयंसेवी फोर्स है जो भारत में पुलिस बल के सहयोग के लिए होती है। 1962 के भारत चीन युद्ध के बाद इस फोर्स का पुर्नगठन किया गया। इससे पहले केवल इसकी कुछ यूनिट कुछ स्थानों पर ही थी। होम गार्ड के जवानों का चुनाव नागरिक पेशेवरों में से ही किया जाता है। जैसे कॉलेज के छात्र, काम करने वाले व्यक्ति और इंडस्ट्रियल वर्कर आदि में से इनका चुनाव किया जाता है जो अपना खाली समय को देश की सेवा में दे सके। होमगार्ड की सबसे पहले स्थापना 1944 में बॉम्बे प्रेसीडेंसी में की गई थी। इसका गठन किसी भी आपात स्थिति में सैन्य बलों का सहयोग करने के लिए किया गया था। होमगार्ड संगठन भारत के कई राज्यों में सक्रिय है। होमगार्ड प्रमुख को डायरेक्टर जनरल ऑफ होम गार्ड कहा जाता है।

आज विक्रम संवत् 2075 मार्ग शीर्ष कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि दिन बृहस्पतिवार आप सभी के मनोकूल हो ।
।।जय श्री राम ।।