11 ओक्टुबर माँ चंद्रघंटा आप सबको सुख शांति समृद्ध प्रदान करें

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शुभ सुप्रभात 💐

🙏आज आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि माँ दुर्गाजी की तीसरी शक्ति माँ चंद्रघंटा के उपासना का दिन है । तीसरे दिन की पूजा का अत्यधिक महत्व है । माँ का यह स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है। इनके मस्तक में घंटे का आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण से इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है। इनके शरीर का रंग स्वर्ण के समान चमकीला है। इनके दस हाथ हैं। इनके दसों हाथों में खड्ग आदि शस्त्र तथा बाण आदि अस्त्र विभूषित हैं। इनका वाहन सिंह है। इनकी मुद्रा युद्ध के लिए उद्यत रहने की होती है।
मां चंद्रघंटा की कृपा से साधक के समस्त पाप और बाधाएँ विनष्ट हो जाती हैं। इनकी आराधना सद्यः फलदायी है। माँ भक्तों के कष्ट का निवारण शीघ्र ही कर देती हैं। माँ सबका कल्याण करे ।

🇮🇳सिंहासन खाली करो कि जनता आती है .
वैसे तो ये रामधारी सिंह दिनकर की गणतंत्र दिवस पर लिखी कविता की पंक्ति है । जेपी से लोकनायक तक का सफर तय करने में इस पंक्ति की सबसे अग्रणी भूमिका रही । आज भारत रत्न लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी की 116वी जयंती है , महान व्यक्तित्व को शत-शत नमन ।।

🎂 11 अक्तूबर, 1902 ई. में सिताबदियारा बिहार में जन्मे जयप्रकाश जी का समाजवाद का नारा आज भी गूँज रहा है। समाजवाद का सम्बन्ध न केवल उनके राजनीतिक जीवन से था, अपितु यह उनके सम्पूर्ण जीवन में समाया हुआ था।

📙समाजशास्त्र से एम. ए की डिग्री हासिल किए उसके बाद वे अमेरिका गए जहाँ 1922 से 1929 ई. के बीच कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बरकली, विसकांसन विश्वविद्यालय में अध्ययन किये ।

🇮🇳भारतीय राजनीति में कूदने के पीछे मौलाना अबुल कलाम आज़ाद का वह भाषण था जो उन्होंने पटना में दिया था ।
“नौजवानों अंग्रेज़ी (शिक्षा) का त्याग करो और मैदान में आकर ब्रिटिश हुक़ूमत की ढहती दीवारों को धराशायी करो और ऐसे हिन्दुस्तान का निर्माण करो, जो सारे आलम में ख़ुशबू पैदा करे।”
जयप्रकाश ने इस वक्तव्य को सुना तो उनके अंतर्मन में हलचल मच गया। जयप्रकाश पढ़ाई छोड़कर आंदोलन में कूद पड़े। और फिर बढ़ते रहे बढ़ते रहे ….

🎖️भारत के स्वतंत्रता संग्राम में महत्त्वपूर्ण योगदान के लिये 1998 में लोकनायक जयप्रकाश नारायण को मरणोपरान्त भारत सरकार ने देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया।

🙏आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ के मज़बूत स्तंभ और प्रख्यात समाजसेवक देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मविभूषण से नवाजे गए चंडिकादास अमृतराव देशमुख यानी नानाजी देशमुख की जयंती है । शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण लोगों के बीच स्वावलंबन के लिए किए गए कार्यों के लिए सदैव याद किए जाते हैं। भारतीय जनसंघ के संस्थापक रहे नानाजी ने 60 साल की आयु के बाद राजनीति से सन्न्यास ले लिया था। अपना शेष जीवन उन्होंने चित्रकूट के गाँवों का कल्याण करने में बिताया और उनके विकास की एक नई गाथा लिखी।
🏘️नानाजी देशमुख का जन्म महाराष्ट्र राज्य के परभनी ज़िले में एक छोटे से गाँव ‘कदोली’ में 11 अक्टूबर, 1916 ई. को हुआ था।
नानाजी ने अपने जीवनकाल में ‘दीनदयाल शोध संस्थान’, ‘ग्रामोदय विश्वविद्यालय’ और ‘बाल जगत’ जैसे सामाजिक संगठनों की स्थापना की। था। उन्हें 1999 में ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित किया गया और इसी साल राज्यसभा के लिए नामांकित किया गया। वे बलरामपुर से लोकसभा के लिये भी चुने गये थे।

🎬सहस्त्राब्दी के महानायक भारतीय सिनेमा के महान् सितारे, जो चार दशक से भी अधिक समय से हिन्दी फ़िल्म उद्योग पर छाये हुए शहंशाह अमिताभ बच्चन के जन्मदिन बहुत बहुत बधाई ।
भारतीय फ़िल्म इतिहास की सबसे महत्त्वपूर्ण शख़्सियत पद्म श्री, पद्म भूषण, पद्म विभूषण, चार बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार, एक बार सर्वश्रेष्ठ नवोदित अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार पाने वाले इंटरनेट पर हुए एक सर्वेक्षण में सहस्त्राब्दी का सर्वाधिक लोकप्रिय एशियाई व्यक्ति चुने जाने के बाद लंदन के विख्यात संग्रहालय, ‘मैडम तुसाद वैक्स म्यूज़ियम’ में मोम प्रतिरूप स्थापित अमिताभ बच्चन के बारे में जितना भी लिखा जाय कम होगा।
🎥सात हिन्दुस्तानी से शुरू सफर ज़ंजीर, दीवार, अमर अकबर एंथनी, शोले, मुकद्दर का सिकंदर, अग्निपथ , हम, चीनी कम, ब्लैक, पा, पीकू से होता हुआ 102 नॉट आउट तक अपनी दमदार अभिनय और बुलन्द आवाज का लोहा मनवाने वाले अमिताभ बच्चन के दादा से लेकर पोता तक फैन है । शायद ही कोई ऐसा इंसान होगा जिसके प्रशसंक तीन पीढ़ी के लोग होंगे ।
🎂एक बार फिर से बहुत बहुत बधाई ।🍰
🙏आप सभी का आज गुरुवार का दिन सर्वाधिक मनोकूल हो ।
🙏जय श्री राम🙏