2 ओक्टुबर , जीवित्पुत्रिका व्रत की शुभकामनाएं

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मंगलमय सुप्रभात , जीवित्पुत्रिका व्रत की शुभकामनाएं
आत्मानः प्रतिकूलानि परेषाम् न समाचरेत्’
अहिंसा परमो धर्मः’

आज है दो अक्टूबर है , आज का दिन अपने आप मे महान है , बड़ा है , ईमानदारी और कर्मठता की मिसाल है , आज हिंदुस्तान के गुलिसते में दो ऐसे फूल खिले जो सदियों तक अपनी खुशबू से हिंदुस्तान के साथ पूरी दुनिया को सुगन्धित करते रहेंगे तथा अपनी महानता के लिए युगों युगों तक याद किये जाते रहेंगे ।  जी हां आज ही के दिन भारत के दो ऐसे महान सपूतों का जन्मदिन हुआ है जिन्होंने अपने महान कर्मों से पूरे हिंदुस्तान को अपना कर्जदार बना लिया। हम बात कर रहे हैं बापू महात्मा गांधी और देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की।

बात करे बापु की तो उनके विचारों को उनके आदर्शों को दुनिया को समझने में करीब 60 साल का वक्त लग गया । आखिर कर जब दुनिया को लगा कि पूरे विश्व में हिंसक हालातों पर नियंत्रण के जटिल होते समस्या का निदान बस एक है वह है बापू के आदर्श । उसके लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 15 जून, 2007 को एक प्रस्ताव पारित कर दुनिया से यह आग्रह किया था कि वह शांति और अहिंसा के विचार पर अमल करे और महात्मा गाँधी के जन्म दिवस को “अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस” के रूप में मनाए। मौजूदा विश्व व्यवस्था में अहिंसा की सार्थकता को मानते हुए बिना वोटिंग के ही सर्वसम्मति से इस प्रस्ताव को पारित कर दिया गया था।
महासभा द्वारा पारित संकल्प में कहा गया कि :
“अहिंसा के सिद्धांत की सार्वभौमिक प्रासंगिकता एवं शांति, सहिष्णुता तथा संस्कृति को अहिंसा द्वारा सुरक्षित रखा जाए।”

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जन्मदिन 2 अक्टूबर को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाना हमारे लिये गर्व की बात है। गांधी की अहिंसा ने भारत को गौरवान्वित किया है, भारत ही नहीं, दुनियाभर में अब उनकी जयन्ती को बड़े पैमाने पर अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जा रहा है।
गाँधीजी का दर्शन और उनकी विचारधारा सत्‍य , अहिंसा और सत्याग्रह के रूप में मूल मंत्र है जिसमे
आधात्‍यमिक और व्‍यवहारिक शुद्धता , शाकाहार ,
सार्वभौमिक शिक्षा, महिलाओं के अधिकार, सामुदायिक सौहार्द, निर्धनता का उन्‍मूलन, खादी को प्रोत्‍साहन देना आदि।

गांधी से महात्मा की उपाधि रविन्द्र नाथ टैगोर की देन है जिन्होंने महात्‍मा’ के शब्‍द को संस्कृत शब्‍दों से बनाया – ‘महा’ का अर्थ है ‘बड़ा’ और ‘आत्‍म’ का अर्थ है ‘आत्‍मा’।

एल्‍बर्ट आइंस्‍टाइन ने गांधी जी के बारे कहा कि :
आने वाली पीढ़ियाँ इस बात पर शायद ही यकीन करेंगी कि हाड़-मांस का बना हुआ कोई ऐसा व्‍यक्ति किसी समय इस पृथ्वी पर आया था”..

इसी प्रकार अमेरिका के प्रसिद्ध हस्ती डॉ. मार्टेन लूथर किंग, जूनियर ने कहा : ” अन्‍य अधिकांश लोगों के समान मैंने भी गाँधी को सुना है, परन्‍तु मैंने कभी गंभीरतापूर्वक उनका अध्‍ययन नहीं किया। जब मैंने उन्‍हें पढ़ा तो मैं अहिंसा के प्रतिरोध पर आधारित उनके अभियानों को देखकर चकित रह गया… सत्‍याग्रह की संपूर्ण संकल्‍पना मेरे लिए अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण थी।”

अर्ल माउंटबेटन ने लिखा “महात्‍मा गाँधी को इतिहास में महात्मा बुद्ध और ईसा मसीह का दर्जा प्राप्‍त होगा”

गाँधी जी विचार और आचार प्रणाली अत्यंत उदात्त, शास्त्र शुद्ध और वस्तुनिष्ठ है। दुनिया में सब जगह जातिवाद और संप्रदायवाद का बोलबाला हो, चारों तरफ तलवार और शस्त्रास्त्रों की भाषा सुनाई दे रही हो, मानव, मानव का बैरी बनने में ही अपने जीवन को सार्थक मान रहा हो, ऐसे में जो महामानव उच्च स्वर में, ‘मुझे मेरी अहिंसा की शर्म महसूस नहीं होती’- ऐसा नम्र आत्म प्रत्यय के साथ कहता हो, मानव-द्रोह के विषैले झंझावात में जिसकी मानव निष्ठा बुझने के बदले और अधिक प्रज्वलित होती हो, उसका चरित्र और चारित्र्य, उसका तत्वज्ञान और नीति, सागर के समान व्यापक है। यह विचार किसी महात्मा के ही हो सकते है ।
शान्ति, अहिंसा और मानवाधिकारों की बातें संसार में बहुत हो रही हैं, किन्तु सम्यक-आचरण का अभाव अखरता है। गांधीजी ने इन स्थितियों को गहराई से समझा और अहिंसा को अपने जीवन का मूल मंत्र बनाया। आज यदि विश्व 2 अक्टूबर को अहिंसा दिवस के रूप में मनाता है, तो इसमें कोई अचंभे वाली बात नहीं है। यह गांधीजी का नहीं बल्कि अहिंसा का सम्मान है। अहिंसा दिवस मनाना तभी सार्थक होगा जब हम उसे अपनी जीवनशैली बनायेंगे।

आज धोती कुर्ते में सिर पर टोपी लगाए गांव-गांव किसानों के बीच घूमकर हाथ को हवा में लहराता, जय जवान, जय किसान का उद्घोष करता छोटे कद का महान व्यक्तित्व वाले लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती है । 9 जून 1964 को प्रधानमंत्री बनने से पहले अपने कार्यो से मशहूर हो चुके थे जिसमें यातायात मंत्री के समय में उन्होंनें प्रथम बार किसी महिला को संवाहक (कंडक्टर) के पद में नियुक्त किया।
प्रहरी विभाग के मंत्री होने के बाद उन्होंने भीड़ को नियंत्रण में रखने के लिए लाठी के जगह पानी की बौछार का प्रयोग प्रारंभ कराया।
स्वतंत्रता आंदोलन में शास्त्री जी का चतुराईपूर्वक दिया ‘मरो नहीं मारो’ का नारा जो एक क्रान्ति के जैसा साबित हुआ।
प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत की आर्थिक समस्याओं से प्रभावी ढंग से न निपट पाने के कारण जहां शास्त्री जी की आलोचना हुई, वही  जम्मू-कश्मीर के विवादित प्रांत पर पाकिस्तान के साथ वैमनस्य भड़कने पर (1965) उनके द्वारा दिखाई गई दृढ़ता के लिये उन्हें बहुत लोकप्रियता मिली।
शास्त्री जी ने किसानों प्रति श्रद्धा भाव के रूप में अन्नदाता कहा तो देश की सीमा प्रहरियों के प्रति उनके अपार प्रेम ने”जय जवान, जय किसान” के उद्घोष के साथ उन्होंने देश को आगे बढ़ाया ।
शास्त्रीजी को उनकी सादगी, देशभक्ति और ईमानदारी के लिये पूरा भारत श्रद्धापूर्वक याद करता है।
बापू के आदर्शों पर चलने वाले लाल बहादुर ने उस समय अपना नाम सुनहरे शब्दों में अंकित कर लिया जब देश के कई हिस्सों में भयानक अकाल पड़ा था। उस समय शास्त्री जी ने देश के सभी लोगों को खाना मिल सके इसके लिए सभी देशवासियों से हफ्ते में 1 दिन व्रत रखने की अपील की थी। आज सशरीर शास्त्री हमारे बीच न सही लेकिन उनके आदर्श हमारे बीच में जिंदा है…इसलिए वो ना होकर भी हमारे बीच मौजूद हैं।

आज के दिन गाँवो से लेकर शहरों तक राज्य की राजधानियों से लेकर देश की राजधानी तक यहाँ तक कि दुनिया भर इतने कार्यक्रम आयोजित है कि लिखा जाय तो पूरी किताब लिखी जा सकती । आखरी में बस इतना ही कहूंगी की एक नारा एक आदर्श “अहिंसा परमो धर्मः” के मार्ग पर चले हर इंसान शांति सकून और आनन्द का राह प्राप्त होगा जो मानव जीवन का मुख्य उद्देश्य है ।

आज अश्विन माह कृष्‍ण पक्ष की आष्टमी है यानी आस्था का पर्व जितिया / जीवित्‍पुत्रिका
हमारे हिन्‍दू धर्म में जितिया व्रत का विशेष महत्‍व है । यह व्रत माँ अपनी संतान की मंगल कामना के लिए करती है , बच्‍चों की लंबी उम्र और उसकी रक्षा के लिए अपने आप को पूर्ण निर्जला रखती हैं । व्रत रखने वाली महिला पूरे दिन और पूरी रात जल की एक बूंद भी ग्रहण नहीं करती है । आस्था के रूप में संतान की सुख शांति के लिए एक माँ के द्वारा किया गया कठिन तप उसकी संतान को सुख शांती प्रदान करता है ।

विक्रम संवत् 2075 आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि दिन मंगलवार आप सभी के शुभ और मनोकूल हो ।

।। जय श्री राम ।।