दशहरा पर ‘शस्त्र पूजन’

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अर्चना राइ भट्ट

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की तरफ से विजयादशमी कार्यक्रम आज, 18 अक्टूबर को मनाया जा रहा है. संघ की स्थापना 1925 में विजयादशमी यानी दशहरा के दिन हुई थी. दशमी पर शस्त्र पूजन का विधान है. इस दौरान संघ के सदस्य हवन में आहुति देकर विधि-विधान से शस्त्रों का पूजन करते हैं. संघ के स्थापना दिवस कार्यक्रम में हर साल ‘शस्त्र पूजन’ खास रहता है.

क्यों किया जाता है ‘शस्त्र पूजन’
दशहरा के मौके पर शस्त्रधारियों के लिए हथियारों के पूजन का विशेष महत्व है. इस दिन शस्त्रों की पूजा घरों और सैन्य संगठनों द्वारा की जाती है. नौ दिनों की उपासना के बाद 10वें दिन विजय कामना के साथ शस्त्रों का पूजन करते हैं. विजयादशमी पर शक्तिरूपा दुर्गा, काली की पूजा के साथ शस्त्र पूजा की परंपरा हिंदू धर्म में लंबे समय से रही है. छत्रपति शिवाजी ने इसी दिन मां दुर्गा को प्रसन्न कर भवानी तलवार प्राप्त की थी.


आरएसएस का ‘शस्त्र पूजन’
संघ की तरफ ‘शस्त्र पूजन’ हर साल पूरे विधि विधान से किया जाता है. इस दौरान शस्त्र धारण करना क्यों जरूरी है, की महत्ता से रूबरू कराते हैं. बताते हैं, राक्षसी प्रवृति के लोगों के नाश के लिए शस्त्र धारण जरूरी है. सनातन धर्म के देवी-देवताओं की तरफ से धारण किए गए शस्त्रों का जिक्र करते हुए एकता के साथ ही अस्त्र-शस्त्र धारण करने की हिदायत दी जाती है. ‘शस्त्र पूजन’ में भगवान के चित्रों से सामने ‘शस्त्र’ रखते हैं. दर्शन करने वाले बारी-बारी भगवान के आगे फूल चढ़ाने के साथ ‘शस्त्रों’ पर भी फूल चढ़ाते हैं.

प्रकृति से मोटापा कैसे कम करें
इस दौरान शस्त्रों पर जल छिड़क पवित्र किया जाता है. महाकाली स्तोत्र का पाठ कर शस्त्रों पर कुंकुम, हल्दी का तिलक लगाते हैं. फूल चढ़ाकर धूप-दीप और मीठे का भोग लगाया जाता है. इसके बाद दल का नेता कुछ देर शस्त्रों का प्रयोग करता है. ये पूजा दिनभर चलती है.

विजयादशमी पर शस्त्रपूजन क्यों
विजयादशमी का पर्व जगजननी माता भवानी का की दो सखियों के नाम जया-विजया पर मनाया जाता है. यह त्यौहार देश, कानून या अन्य किसी काम में शस्त्रों का इस्तेमाल करने वालों के लिए खास है. शस्त्रों का पूजन इस विश्वास के साथ किया जाता है कि शस्त्र प्राणों की रक्षा करते है. विश्वास है कि शस्त्रों में विजया देवी का वास है.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शस्त्रपूजन

इस साल के कार्यक्रम का आयोजन रेशीमबाग मैदान में आयोजित किया गया है. नोबेल पुरस्कार से सम्मानित सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी समारोह में मुख्य अतिथि हैं. आरएसएस विजयादशमी कार्यक्रम आज, 18 अक्टूबर सुबह सात बजकर 40 मिनट पर शुरू हो चुका है.

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संघ की स्थापना
संघ की स्थापना 27 सितंबर 1925 में विजयादशमी के दिन डॉ. केशव हेडगेवार द्वारा की गयी थी.
हेडगेवार ने अपने घर पर ही 17 लोगों के साथ गोष्ठी में संघ के गठन की योजना बनाई थी.

शस्त्रपूजन के मौके पर शस्त्रों का प्रदर्शन

1975 में आपातकाल के दौरान संघ पर भी प्रतिबंध लगाया गया था.1975 के बाद से धीरे-धीरे संगठन का राजनैतिक महत्व बढ़ा. आज भाजपा को संघ की राजनैतिक शाखा के रूप में देखा जाता है