भारत माता के वीर जांबाज नायक को उनके बलिदान को इस देश के हर राष्ट्रवादी सोच के लोग जिंदा रखेगे

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एक देश में दो निशान, एक देश में दो प्रधान, एक देश में दो विधान नहीं चलेंगे, नहीं चलेंगे ….जैसे नारो से गूँजती जम्मू की वादिया , 1952 में उस विशाल रैली को कौन भूल सकता जिसमे संकल्प हुआ था कि “या तो मैं आपको भारतीय संविधान प्राप्त कराऊँगा या फिर इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए अपना जीवन बलिदान कर दूँगा ।

राष्ट्रीय एकता के धरातल पर ही सुनहरे भविष्य की नींव रखी जा सकती है जैसे विचारों से संसद में अपना वक्तव्य देने वाले प्रखर राष्ट्रवादी ,कट्टर देशभक्त ,महान् शिक्षाविद, चिन्तक, सच्चे अर्थों में मानवता के उपासक , सिद्धांतों के पक्के , कर्मठ और जुझारू व्यक्तित्व वाले इंसान भारतीय जनसंघ के संस्थापक जो सदैव राष्ट्रीय एकता की स्थापना को ही अपना प्रथम लक्ष्य रखा हो वैसे महान व्यक्तित्व वाले महान राजनेता डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की बलिदान दिवस पर महिला कल्याण समिति के तरफ से कोटि कोटि श्रद्धांजलि सत सत नमन ।

मात्र तैंतीस वर्ष की आयु में कलकत्ता विश्वविद्यालय में विश्व के सबसे कम उम्र के कुलपति बने , इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ़ साइंस’, बंगलौर की परिषद एवं कोर्ट के सदस्य और इंटर-यूनिवर्सिटी ऑफ़ बोर्ड के चेयरमैन , हिन्दू महासभा के अध्यक्ष , बंगाल विधान परिषद के सदस्य , विरोधी दल के नेता , वित्त मंत्री , पंडित जवाहर लाल नेहरू के मंत्री मंडल में उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री के पद को सुशोभित करने वाले डॉ मुखर्जी 6 अप्रैल 50 को त्यागपत्र दे कर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संघचालक गुरु गोलवलकर जी से परामर्श करने के बाद 21 अक्तूबर, 1951 को दिल्ली में ‘भारतीय जनसंघ’ की नींव रखी और इसके पहले अध्यक्ष बने।
11 मई 1953 को जम्मू कश्मीर के वर्तमान शेख़ अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार ने हिरासत में ले कर नजरबंद कर दिया । कुछ दिन बाद आज ही के दिन 23 जून, 1953 को प्रातः काल 3:40 बजे रहस्यमय परिस्थितियों में उनकी मृत्यु हो गई। उनकी मृत्यु का खुलासा आज तक नहीं हो सका है। भारत की अखण्डता के लिए आज़ाद भारत में यह पहला बलिदान था। ऐसे महान भारत माता के वीर जांबाज नायक को उनके बलिदान को इस देश के हर राष्ट्रवादी सोच के लोग जिंदा रखेगे ।
हमे गर्व है कि आपके द्वारा तय किये गए राह पर चलते हुए हम बेमिसाल हिंदुस्तान की तरक्की में चार चांद लगा रहे है ।