बिहार दिवस पर दिल्ली में बिहार के कलाकारों की प्रस्तुती को मिडिया की नजर से

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बिहार दिवस पर दिल्ली में महिला कल्याण समिति पटना द्वारा

महिला कल्याण समिति पटना के द्वारा  विश्व रंगमंच दिवस के दिन बिहार उत्सव में पटना की संस्था अपने 21 सदस्यों के साथ परफॉर्मेंस किया जिसका मंच संचालन संस्था की सचिव और चर्चित उदघोषिका अर्चना राय भट्ट ने किया । रंगमंच को जीने वाले इसे ज़िंदगी जीने का सलीक़ा कहते हैं। रंगमंच ज़िंदगी को ज़िंदगी की तरह जीने का मौका देता है। रंगमंच के पथ पर चलकर जीवन को जानने, समझने और जीने का हुनर आता है। सबकी अपनी अपनी सोच और विचार होते किन्तु यह तो सच है कि जीवन एक ऐसा रंगमंच है ,जहाँ किरदार को खुद नही पता होता की अगला दृश्य क्या होगा , कभी हँसी कभी गम कभी दर्द तो कभी प्रेम का समावेश होता | भारत में भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के “अंधेर नगरी” कालिदास रचित अभिज्ञान शाकुंतलम्, मोहन राकेश का आषाढ़ का एक दिन, मोलियर का माइजर, धर्मवीर भारती का ‘अंधायुग’, विजय तेंदुलकर का ‘घासीराम कोतवाल’ जैसे नाटकों से देश प्रेम तथा नवजागरण की चेतना ने समाज में तत्कालीन से लेकर आज भी प्रसांगिक है। आज बदलते समावेश में रंगमंच का आकर्षण वैसा नही रहा लेकिन जितना है उतना प्रभाविक और प्रासंगिक है ।